स्पेन में मुकद्दर के सिकंदर को पीएम की कुर्सी

जो दांव खेलना जानते हैं उनके लिए सियासत हमेशा संभावनाओं का खेल है। इस बात को पेद्रो सांचेज से बेहतर कौन जान सकता है। बीते दो साल में उन्होंने अपनी पार्टी के मुखिया का पद गंवाने से लेकर अब प्रधानमंत्री की कुर्सी पाने तक बहुत उथल पुथल देखा है। इस कुर्सी पर वह कितने समय तक रह पाएंगे, यह कहना तो अभी मुश्किल है लेकिन छह साल से इस पर जमे बैठे मारियानो राखोय को उन्होंने बाहर का रास्ता जरूर दिखा दिया है। इस बात से किसी को इनकार नहीं कि राखोय ने स्पेन को आर्थिक संकट से निकाला और वह देश की अर्थव्यस्था को वापस पटरी लाए। लेकिन एक रिश्वतकांड उनके गले की फांस बन गया। उनकी पीपुल्स पार्टी पर आरोप है कि उसने स्पेन की बड़ी कंपनियों से रिश्वत ली और बदले में उन्हें सरकारी कॉन्ट्रैक्ट दिए गए। इस मामले में राखोय की पार्टी के दो दर्जन पदाधिकारियों और नेताओं को जेल की सजा हो चुकी है। पार्टी के एक पूर्व कोषाध्यक्ष को तो 33 साल की जेल हुई है। अपने खातों में गोलमाल करने के लिए पीपुल्स पार्टी पर भी ढाई लाख यूरो का जुर्माना ठोंका गया है। पार्टी भ्रष्टाचार के आरोपों में इस कदर घिर चुकी है कि जब राखोय शुक्रवार को संसद में आए तो उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही हार मान ली और अपने खिलाफ मुहिम चलाने वाले साचेंज को अगले प्रधानमंत्री के तौर पर बधाई भी दे दी।
अब स्पेन की सत्ता सांचेज के हाथ में हैं। हालांकि 350 सदस्यों वाली संसद में उनकी सोशलिस्ट पार्टी के पास सिर्फ 84 सीटें हैं। इसलिए इस बात को लेकर भी अटकलें लग रही हैं कि वह कितने दिन तक प्रधानमंत्री पद पर रह पाएंगे। हालांकि राखोय भी दो साल से स्पेन में अल्पमत की सरकार ही चला रहे थे। उनकी पार्टी 2015 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी तो बनी थी लेकिन बहुमत उसके हाथ से फिसल गया। दिसंबर 2011 के चुनावों में 187 सीटें जीतने वाली पार्टी 123 सीटों पर सिमट गई। खंडित जनादेश के बीच जब गठबंधन सरकार बनाने की सारी कोशिशें नाकाम हो गईं तो छह महीने के भीतर देश में दोबारा चुनाव कराने पड़े। स्पष्ट बहुमत फिर भी किसी पार्टी को नहीं मिला, लेकिन राखोय की पार्टी की सीटें 123 से बढ़कर 137 हो गईं और वह अल्पमत की सरकार बनाने में कामयाब रहे। लेकिन सांचेज इसके खिलाफ थे।

उन्होंने राखोय को प्रधानमंत्री बनाए जाने के खिलाफ वोट दिया, लेकिन सांचेज की पार्टी ने ही इस मुद्दे पर उनका साथ नहीं दिया। पार्टी के बहुत से सदस्य नहीं चाहते थे कि फिर से चुनाव कराए जाएं। सांचेज के खिलाफ बगावत हो गई और उन्हें पार्टी प्रमुख का पद गंवाना पड़ा। लेकिन अब राखोय से प्रधानमंत्री पद झटक कर सांचेज ने हिसाब बराबर कर लिया है। साथ ही उनके मन में 2015 और 2016 के चुनाव में राखोय के हाथों दो बार हार जाने की कसक भी रही होगी। सांचेज स्पेन में तानाशाही खत्म होने के बाद सातवें प्रधानमंत्री हैं। वह 2020 में होने वाले अगले चुनाव तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने की बात कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए उन खूबियों और काबलियतों को बखूबी इस्तेमाल करना होगा जो उन्होंने बीते 25 साल के राजनीतिक करियर में हासिल की हैं। उनके कंधों पर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी है, तो कैटोलोनिया इलाके में उठ रही आजादी की मांग से भी उन्हें निपटना होगा।

सांचेज ने आजादी के विवादास्पद मुद्दे पर कैटेलोनिया की सरकार के साथ बातचीत कर रास्ता निकालने का वादा किया है। इसके अलावा फैलते उदारवाद और दक्षिणपंथ के इस दौर में उन्हें 139 साल पुरानी वामपंथी रुझान वाली अपनी सोशलिस्ट पार्टी का वैचारिक मोर्चे पर भी बचाव करना होगा। सांचेज का कहना है कि उन्हें अपनी जिम्मेदारी का बखूबी अहसास है और उनका पूरा जोर देश को आधुनिक बनाने के साथ साथ उन लोगों की सामाजिक जरूरतों को पूरा करने पर रहेगा जो असमानता झेल रहे हैं। इटली में दो पॉपुलिस्ट पार्टियों की गठबंधन सरकार से सहमे यूरोपीय संघ के लिए कम से कम राहत की बात यह है कि सांचेज ईयू समर्थक नेता हैं। वित्तीय अनुशासन के लिए यूरोपीय संघ के सभी नियमों के प्रति उन्होंने वचनबद्धता दोहराई है। मास्टर्स की पढ़ाई उन्होंने ब्रसेल्स में की, जिसमें उनका विषय यूरोपीय आर्थिक नीति रहा है। राखोय सरकार की तरफ से पारित बजट का वह पहले ही समर्थन कर चुके हैं। संसद में कम सीटों के कारण सांचेज शायद राखोय की सरकार के दौरान पारित बड़े ढांचागत सुधारों में बड़ा बदलाव करने से पहले कई बार सोचेंगे।

यूरोपीय आयोग के प्रमुख जाँ क्लोद युंकर ने सांचेज को भेजे बधाई पत्र में भी यही उम्मीद जताई है कि स्पेन मजबूत, एकजुट और निष्पक्ष यूरोप के लिए अपना योगदान देता रहेगा। बढ़ते दक्षिणपंथी रुझान और ईयू विरोधी आवाजों के बीच यूरोपीय संघ के लिए सबसे अहम तो यही है कि ईयू एकजुट बना रहे। यूरोपीय संघ के अहम देश जर्मनी ने भी स्पेन में स्थायी सरकार की कामना की है। बास्केटबॉल के फैन और दो बेटियों के पिता सांचेज यूरोपीय संसद और संयुक्त राष्ट्र में भी काम कर चुके हैं। समर्थक कहते हैं कि शांत स्वभाव के सांचेज में समझौता करने और बीच का रास्ता निकालने की गजब की प्रतिभा है, तो विरोधियों की नजर में वह एक ऐसे नेता है जिनमें न कोई करिश्मा है और न ही स्पष्ट राजनीतिक दूरदर्शिता। लेकिन 21 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखने वाले सांचेज के पास सियासी अनुभव की कमी नहीं है।

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