योगी का विरोध करनेवाले मंत्री और शिवपाल यादव की बंद कमरे में गुफ्तगू, अटकलें तेज

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने शुक्रवार (15 जून) को वाराणसी के सर्किट हाउस के एक बंद कमरे में गुफ्तगू की है। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक चली इस बैठक के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इस गुप्त बैठक को 2019 के लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। बता दें कि ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री हैं। वो कई मौकों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना कर चुके हैं और उनके बयान से कई बार राज्य सरकार और बीजेपी को परेशानी हो चुकी है। ओमप्रकाश राजभर ने बैठक के बाद कहा कि वो एनडीए में हैं और एनडीए में ही रहेंगे। उन्होंने दोनों नेताओं की मुलाकात को औपचारिक मुलाकात करार दिया। हालांकि, राजभर ने बंगला विवाद में अखिलेश यादव का बचाव किया और कहा कि चाहे मैं हूं या कोई भी बंगला खाली करते तोड़फोड़ नहीं करता। उन्होंने कहा कि यह बदनाम करने की साजिश हो सकती है।

राजनीति के जानकार कहते हैं कि बाबा की नगरी में इन दोनों पिछड़े नेताओं की मुलाकात औपचारिक से ज्यादा है क्योंकि हाल के दिनों में जिस तरह से पिछड़े और दलित वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है, उससे 2019 के लोक सभा चुनाव में देश की सियासत में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं रह सकता है। हाल के दिनों में हुई राजनीतिक जुगलबंदी ने सियासी उलटफेर के संकेत दे दिए हैं। माना जा रहा है कि अगले साल होते-होते यह उलटफेर बड़ा हो सकता है। उत्तर प्रदेश में जिस तरह के राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं उसके बीच इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि ओम प्रकाश राजभर राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए महागठबंधन में शामिल नहीं हो सकते हैं।

उधर, पारिवारिक कलह में अक्सर निशाने पर रहे शिवपाल सिंह यादव ने अपने भतीजे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बंगला प्रकरण में बचाव किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी उन्हें बदनाम करने की नीयत से दुष्प्रचार कर रही है। शिवपाल सपा के बड़े नेता माने जाते हैं। जोड़-तोड़ करने में शिवपाल माहिर माने जाते हैं। बता दें कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी राजभर पर पहले ही डोरे डाल चुके हैं। अखिलेश कह चुके हैं कि राजभर सही आदमी हैं लेकिन गलत पार्टी के साथ हैं।

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