मुज़फ्फरनगर के बुढ़ाना में श्री शनिदेव जयंती महोत्सव पर निकाली गई विशाल भव्य  शोभायात्रा की खास रिपोर्ट पढ़िए मेरठ मंडल ब्यूरो संजीव कुमार बंसल के साथ

मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना के मेरठ मंडल ब्यूरो संजीव कुमार बंसल की रिपोर्ट

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बुढ़ाना। बुढ़ाना कस्बे में शुक्रवार के दिन श्री शनि देव जयंती बड़े ही श्रद्घा के साथ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर विशाल शोभायात्रा भी निकाली गई। योगपुरा महादेव मंदिर (शनि धाम) में सुबह से अभिषेक के बाद पूजा अर्चना हुई। यहां पर दिन भर श्रद्घालुओं की भीड़ उमडी रही। पूजा का दौर शाम तक चलता रहा। उक्त मंदिर में सुबह पांच बजे शनि देव का अभिषेक किया गया। दोपहर को आरती व हवन किया गया। शाम को कस्बे के मुख्य मार्गों पर विशाल शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा उक्त मंदिर से शुरू होकर पीठ बाजार, बड़ा बाजार, पुरानी तहसील, पारसी बस स्टैंड को निकलकर नदी मंदिर रोड को होती हुई प्राईवेट बस स्टैंड, महावीर तिराहा, कांधला रोड, चरण सिंह चौक, बडोत रोड को होकर मास्टर कालोनी व डी ए वी रोड को निकलकर मंदिर पर जाकर समाप्त हुई। बताया जाता है कि शनि जयंती का पावन पर्व ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। यह हिन्दू धर्म का विशेष पर्व है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। शनि जयंती के दिन ही सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। शनि जयंती का पर्व पूर देश भर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग शनि देव को विशेष पूजन द्वारा खुश करने का प्रयास करते हैं। शनि जयंती से जुड़ी एक कथा प्रचलित है। स्कन्द पुराण की एक कथा के अनुसार सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था। सूर्य देव को संज्ञा से तीन पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। सूर्य देव ने उनका नाम यम, यमुना और मनु रखा। संज्ञा शनि देव के तेज को अधिक समय तक नहीं सहन कर पायी। इसलिए उसने अपनी छाया को सूर्य देव के पास छोड़ दिया और वहां से चली गईं। कुछ समय बाद सूर्य देव से छाया को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिन्हें शनि देव के नाम से जाना गया। शनि जयंती के दिन पूरे विधि विधान से शनि देव का पूजन किया जाता है। शनि देव की पूजा करते समय विशेष ध्यान देना अनिवार्य होता है। माना जाता है कि यदि शनि देव क्रोधित हो जाते हैं तो घर की सुख-शांति भंग हो जाती है। शनि जयंती के दिन पूजा-पाठ करके काला कपड़ा या दाल तथा लोहे की वस्तु दान करने से शनि देव सभी कष्टों को दूर कर देते हैं। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए तिल, उड़द, मूंगफली का तेल, काली मिर्च, आचार, लौंग, काले नमक आदि का प्रयोग करना चाहिए। भगवान शनिदेव को श्याम यानि काली वस्तुओं से अत्यधिक प्रेम होता है। शनिदेव की पूजा में काले तिल, उड़द की दाल आदि का भोग लगाया जाता है। इस मौके पर विनय गर्ग कुरथल, चिराग संगल व अर्चित गर्ग,प्रवीण गर्ग, आदि मौजूद थे।

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