PAK में किसने ने किया था मुंबई हमला’ पूर्व PM नवाज शरीफ ने बताया, जानने के लिए page को लाइक करे 

मुंबई हमले पर पाकिस्तान ने अपना गुनाह कबूल लिया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ बोले हैं कि उन्हीं के मुल्क के आतंकियों ने भारत के मुंबई पर हमला बोला था। शरीफ ने कहा है, “क्या हमें आंतकियों को सीमा पार जाने देना चाहिए? मुंबई में 150 लोगों को क्या उन्हें मारने देना चाहिए?” पाकिस्तान के पूर्व पीएम ने ये बात डॉन अखबार को दिए इंटरव्यू में कबूली है। आपको बता दें कि साल 2008 में महाराष्ट्र के मुंबई में आतंकी हमला हुआ था। 166 बेगुनाह लोगों की उस दौरान जान चली गई थी।

शरीफ को अपने पद से हटे हुए लगभग नौ महीने हो चुके हैं। पनामा पेपर केस में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पिछले साल 28 जुलाई को दोषी करार दिया था, जिसके बाद उन्हें अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने इसके बाद शरीफ पर आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। संविधान की धारा 62 (1) (एफ) के अंतर्गत उन्हें इसके लिए अयोग्य करार दिया गया गया था।

वहीं, मुंबई हमलों की बात करें तो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान शुरुआत से इस बात से किनारा करता आया है कि उसका मुंबई हमलों में कोई हाथ था। भारत ने इस संबंध में पूर्व में एक डोजियर भी पेश किया था। साथ ही कई पुख्ता सबूत भी सौंपे थे, मगर पाकिस्तानी सरकार ने अपने देश के आंतकियों की ओर से किए गए हमले पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।

शरीफ ने ताजा इंटरव्यू में कहा, “पाकिस्तान में आतंकी सक्रिय हैं। क्या हमें उन्हें सीमा पार करने देना चाहिए? क्या उन्हें मुंबई में जाकर 100 से अधिक लोगों को मारने देना चाहिए? हम लोग तो पूरा केस भी नहीं चलने देते हैं।” वह आगे बोले कि किसी देश को चलाने के दौरान उसके साथ समानांतर सरकार नहीं चलाई जा सकती हैं। यह सब बंद करना पड़ेगा। आप सिर्फ एक ही सरकार चला सकते हैं।

बकौल पाकिस्तानी पूर्व पीएम, “मुझे अपने ही लोगों ने राजनीति से बाहर का रास्ता दिखा दिया। समझौते करने के बाद भी कई बार मेरे विचारों को माना नहीं गया। अफगानिस्तान की सोच को मान लिया जाता है, मगर हमारी सोच पर विचार नहीं होता।” हालांकि, वह इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि उन्हें अपनी सरकार की नाकामी के कारण कुर्सी खोनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला?: मुंबई में 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी समुद्र के रास्ते घुस आए थे। वे यहां आकर चार दिनों तक ताज होटल में छिपे रहे थे, जबकि शहर में सात जगहों पर उन्होंने गोलीबारी की थी। आतंकी हमले में तब करीब 166 लोगों की जान गई थी, जबकि 300 के आसपास लोग जख्मी हुए थे।

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