SC का आदेश- रेप पीड़िताओं को 5 लाख, एसिड अटैक में 7 लाख रुपए दें मुआवजा

महिला उत्पीड़न के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (11 मई) को अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने रेप पीड़िताओं को मुआवजा देने वाली योजना को मंजूरी देते हुए कहा कि अब से रेप पीड़िताओं को मिलेगा। रेप के मामलों में मुआवजे की न्यूनतम रकम पांच लाख रुपए होगी, जबकि एसिड अटैक वाले मामलों में यह राशि न्यूनतम सात लाख रुपए दी जाएगी। सभी राज्यों को इस संबंध में एक हफ्ते के भीतर स्कीम भेज दी जाएगी, जिसके बाद हर राज्य को उसका पालन करना पड़ेगा।

वर्तमान में रेप पीड़िताओं को राज्य सरकारें अपने पैमानों के हिसाब से मुआवजा मुहैया कराती हैं। मसलन किसी राज्य में यह रकम 20 हजार है, जबकि कहीं पर मुआवजा दो लाख रुपए दिया जाता है। मगर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद पीड़िताओं को मिलने वाली रकम समान हो जाएगी। ऐसे में उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा।

आपको बता दें कि नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (एनएलएसए) ने मुआवजे की रकम को रिलीफ पॉलिसी के अंतर्गत तय किया था, जिस पर कोर्ट अपनी सहमति दे दी है। अथॉरिटी ने यह रकम तय करने के लिए केंद्र सरकार के साथ चर्चा की थी, जिसमें फैसला हुआ था कि पीड़िताओं को मुआवजे के रूप में कम से कम पांच लाख रुपए से लेकर सात लाख रुपए दिए जाएंगे।

कोर्ट के आदेश के बाद अथॉरिटी की ओर से कहा गया कि कोर्ट के आदेश पर यह स्कीम तैयार की गई थी। रेप, गैंगरेप और एसिड अटैक के मामलों में इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में रहने वाली पीड़िताओं और उनके परिजन को आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाएगी। वे इसके जरिए कानूनी लड़ाई लड़ सकेंगी।

बलात्कार और अप्राकृतिक संबंधों के मामले में न्यूनतम चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा, जबकि गैंगरेप या जान जाने की स्थिति में स्कीम के अंतर्गत पीड़ित या उसके परिजन को न्यूतम पांच लाख रुपए बतौर मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे, जबकि अधिकतम रकम 10 लाख रुपए होगी। वहीं, शरीर के किसी हिस्से में चोट लगने या 80 प्रतिशत तक उस अंग के काम न करने की हालत में दो लाख रुपए माली सहायता के तौर पर दिए जाएंगे।

रेप, गैंगरेप, अप्राकृतिक सेक्स और एसिड अटैक के मामलों में पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने वाली यह योजना हर राज्य में लागू होगी। अगर महिला कई अपराधों का शिकार होती है तो वह मुआवजे की पूरी रकम की हकदार होगी। पीड़िता की मौत पर उसके परिजन को 10 लाख रुपए मिलेंगे।

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