कॉन्‍ट्रैक्‍ट खत्‍म हो गया, सरकार सोई रही: 25 अप्रैल से पूरे बिहार के सरकारी अस्‍पतालों में एक्‍सरे, अल्‍ट्रासाउंड बंद

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। ये हालात तब हैं जब केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे खुद बिहार से आते हैं। बीते 25 अप्रैल से पूरे प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। एक्सरे और अल्ट्रासाउण्ड जैसी मूल सुविधा के अभाव में पूरे प्रदेश के मरीज बेहाल हैं। लेकिन अभी तक अधिकारियों ने मरीजों को राहत दिलाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाए हैं। ऐसा नहीं है कि मरीजों पर ये संकट कोई अचानक आन पड़ा है।

दरअसल पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की जांच का काम सिलवासा की एक कंपनी आईजीआई मेडिकल सिस्टम करती है। इनमें सदर, अनुमंडल और प्राथमिक के अलावा रेफरल अस्पताल भी शामिल हैं। बीते 25 अप्रैल को इस कंपनी से राज्य सरकार के करार की अवधि पूरी हो चुकी है। बिहार सरकार ने आगे इस कंपनी से काम न लेने का फैसला पहले ही कर लिया था। कंपनी मियाद पूरी होने के बाद काम करना बंद कर चुकी है। लेकिन प्रशासन और शासन ने अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।

करारनामा खत्म होने से पहले ही अधिकारियों ने इसी अफरा-तफरी की आशंका जताई थी। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव और राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक अधिकारी लोकेश कुमार सिंह ने इस संबंध में पूरे प्रदेश के सिविल सर्जनों को पत्र लिखा था। अपने पत्र में लोकेश कुमार सिंह ने साफ कहा था कि आईजीई मेेडिकल सिस्टम से करार की मियाद 25 अप्रैल से पूरी हो रही है। 26 अप्रैल से मरीजों की असुविधा न हो इसलिए स्थानीय स्तर पर इंतजाम कर लिया जाए। लेकिन बिहार के सिविल सर्जनों ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। अब पूरे बिहार के लगभग हर सरकारी अस्पताल में मरीज परेशान हैं।

बुधवार (9 मई) को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे बिहार के भागलपुर ​में थे। उनसे जब इस समस्या के बारे में सवाल किया गया तो अश्विनी चौबे ने कहा,’एजेंसी से सरकार के इकरारनामे की अवधि पूरी होने की वजह से समस्या पैदा हुई है। राज्य सरकार इस मामले में संजीदा है।’ लेकिन जमीनी हालात कुछ और हैं। एक्सरे और अल्ट्रासाउण्ड न होने से पूरे बिहार में पिछले 15 दिनों से लोग परेशान हैं। वहीं इस मौके का फायदा उठाकर निजी अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सेंटर गरीब मरीजों को खुले हाथों से लूट रहे हैं।

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