आदिशक्ति पीठ  देवीपाटन मंन्दिर मे चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि को नेपाल के दांग चौघडा़ से आने वाली पीर रत्ननाथ की शोभायात्रा भारत-नेपाल सरकार की अखंडता की मिशाल है।

 बलरामपुर से जिला संवाददाता अभिषेक गुप्ता की रिपोर्ट

आदिशक्ति पीठ  देवीपाट

न मंन्दिर मे चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि को नेपाल के दांग चौघडा़ से आने वाली पीर रत्ननाथ की शोभायात्रा भारत-नेपाल सरकार की अखंडता का मिशाल है। इस शोभायात्रा में पात्र देवता के रूप में पीर रत्ननाथ बाबा के दर्शन के लिए हिन्दु मुस्लिम समुदाय के लोग भोर से पल्के बिछाए रहते हैं। मान्यता के अनुसार मुर्गो को दाना चुंगाकर मांगी गई मन्नत पूरी होती है। साथ ही आटे और गुण की बनी रोट का भोग लगाया जाता है। वही नेपाल के पूजारियो द्वारा ही नवरात्र के पंचमी से लेकर नवमी तक पूजा अर्चना की पूरी जिम्मेदारी ले ली जाती है। जिसमे देवीपाटन के घंटे- घडियाल का उपयोग नही किया जाता है। पीर रत्ननाथ बाबा के साथ आया घंटा और नगाडा़ ही बजाया जाता है। 

     शक्तिपीठ देवीपाटन मंन्दिर के महन्थ मिथलेश नाथ योगी ने बताया कि नवरात्र की पंचमी को नेपाल के दांग चौघडा़ से आने वाली पीर रत्ननाथ की शोभायात्रा का विशेष महत्व है।  उनके आगमन पर तुलसीपुर नगर में जगह जगह पर श्रद्धालुगण भव्यता के साथ स्वाडत करते हैं। उनके पूजन मै सांस्कृतिक बलि देने की विशिष्ट के बारे मैं भी जानकारी दी। माताएं अपने बच्चो की सलामती के लिए रोट चढा़ती है। इनकी पूजा अर्चना के लिए सफेद रंग के फूल और मदार के फूल से किया जाता है।

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