जनपद में विश्व महिला सशक्तिकरण दिवस पर विभिन्न विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें नारी शक्ति को सम्मानित किया गया।               *अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस* के अवसर पर  विशेष जानकारी ..

मुजफ्फरनगर से राजीव गोयल की रिपोर्ट


पूरी दुनिया में 8 मार्च को *अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस* बहुत धूमधाम और उसके साथ मनाया जाता है । यह दिन दुनिया की  महिलाओं द्वारा अर्जित उपलब्धियों के प्रति कृतज्ञता , प्यार और सम्मान व्यक्त करने का दिन है।  कुछ लोग इस दिन का जश्न बैंगनी रंग का रिबन पहनकर भी मनाते हैं । 
दुनिया में पहला महिला दिवस न्यूयॉर्क शहर में 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था । उस समय यह दिन नारियों के प्रति सामाजिक चेतना और समानता का भाव समाज में पैदा करने के लिए मनाया गया था । बाद में यह दिन फरवरी महीने के आखिरी रविवार को मनाया जाने लगा । पहले इसका मकसद महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलाना भर था क्योंकि उस समय ज्यादातर देश में महिलाओं को वोट देने का अधिकार ही नहीं था । 1970 में कोपेनहेगन में हुए सम्मेलन के बाद इस दिन को अंतरराष्ट्रीय मानयता दी गई 1919 में रूस में निरंकुश जार का शासन समाप्त होने के बाद बनी अंतरिम सरकार में महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया गया और महिला दिवस पर रूस में राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया । धीरे-धीरे यह दिवस विश्व के ज्यादातर देशों में मनाया जाए लगा । कुछ पूर्वी देश भी इस दिन को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं ।
1917 के आखिरी रविवार की तारीख 23 फरवरी थी मगर जब रूस में ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाया तो नए कैलेंडर के अनुसार यह दिन 8 मार्च हो गया  इसलिए 1917 के बाद से यह दिन हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है ।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश विदेश की सभी माओं , बहनों और बेटियों को शत शत प्रणाम औऱ बधाई ….💐💐

    महिला सशक्तिकरण युग की अनिवार्यता है मुजफ्फरनगर 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आचार्य कुल के प्रांतीय अध्यक्ष मोतीलाल शर्मा प्रमुख गांधी विचारक के नेतृत्व में झांसी रानी स्थित पूर्वी पाठशाला परिसर में जिला आचार्य कुल एवं हत्यार बिंदु सेवा संस्थान के सौजन्य से महिला सशक्तिकरण विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित हुई जिसकी अध्यक्षता श्रीमती सुशीला अग्रवाल पूर्व विधायक नेकी तथा संचालन राष्ट्रीय आचार्य सीताराम एवं भरत शर्मा एडवोकेट ने संयुक्त रुप से किया जिला महिला सशक्तिकरण एवं दिव्यांगजन अधिकारी गजल भारद्वाज इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रही जिला महिला चिकित्सालय की अमिता गर्ग जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती आशा सिंह प्रमुख साहित्यकार पुष्प लता नगर शिक्षा अधिकारी डॉक्टर सविता डबराल पूजा बहन ब्रह्माकुमारी आश्रम सोशल वर्कर अर्चना गोयल शुक्र ताल मीरा सक्सेना एडवोकेट नीलम शर्मा एडवोकेट श्रीमती पूनम शर्मा बहन शशि गुप्ता अमरीश बहन इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि दिया गया इस अवसर पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भ्रूण हत्या निषेध नारी रक्षा राष्ट्र रक्षा महिला आरक्षण बहन बेटियों का संरक्षण तथा भारतीय दर्शन में नारी का स्थान जैसे विषयों पर जैसे विषयों पर प्रकाश डालते हुए सभी वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण को युग की अनिवार्यता बताया जिला आचार्य कुंद के अध्यक्ष चौधरी राजवीर सिंह उपाध्यक्ष मोहम्मद इदरीश सह मीडिया प्रभारी मोहम्मद अनस एवं डॉ नीलम मलिक मास्टर सत्य प्रकाश शर्मा तेजपाल सिंह डॉ अनिता सिंह प्रेमप्रकाश सुधा विनोद शर्मा सत्यपाल सिंह पाल महबूब आलम एडवोकेट लॉक चंद्र कमल गोयल श्रीमती चित्र गुप्ता साक्षी शर्मा अनुराधा शर्मा मोनिका शर्मा मोहनलाल सट्टा मुकेश गुप्ता द्वारा व्यवस्था प्रबंधन कर उपस्थित मातृशक्ति पर पुष्प वर्षा की माला भेद की तथा शाल ओढ़ाकर व साहित्य भेंट कर सम्मानित किया इस अवसर पर आनंद प्रकाश शर्मा एडवोकेट सुदेश सपना अगरवाल सुपौल चौधरी आचार्य वेद प्रकाश शर्मा कस्तूर सिंह सैनी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।             
*‘रूकी हुई जिंदगियों को रफ्तार दे चुकी है बुढ़ाना की बेटी’*
– डा. रूचि साल में कम से कम एक माह का वेतन करती हैं दान 
– संस्कृत भाषा का उत्थान व गरीब बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना है उद्देश्य 
* ‘समन्दर की एक बूंद बन जांऊ भले, बस समन्दर में मेरा अस्तित्व रहे।’ शायद इसी लाइन का मतलब समझकर बुढ़ाना की बेटी ने समाज के लिए कुछ कर गुजरने की ठान ली है। डा. रूचि साल में कम से कम एक माह का वेतन गरीबों के लिए दान करती हैं। इतना ही नहीं डा. रूचि तीन दर्जन से अधिक रूकी हुई जिंदगियों को रफ्तार दे चुकी हैं। अब संस्कृत भाषा के उत्थान के साथ-साथ गरीब बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना उन्होंने अपना उद्देश्य बना लिया है। 

कस्बे के मोहल्ला पछाला निवासी रूचि गुप्ता पुत्री सुभाष चंद गुप्ता ने 12वीं तक की पढ़ाई कस्बे के डीएवी इंटर कालेज से की। उसके बाद राजकीय महाविद्यालय कांधला से बीए की टॉपर रही रूचि ने बडौत के दिगंबर जैन डिग्री कालेज से 1998 में संस्कृत विषय से परास्नातक की डिग्री प्राप्त की। नेट क्वालीफाई करने के बाद रूचि ने 1999 में जेआरएफ की परीक्षा पास की। जिसके बाद सितंबर 2001 में रूचि का आयोग से चयन हुआ, जिसमें सामान्य वर्ग से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चयनित होने वाली रूचि अकेली महिला थी। जिसके बाद सन 2006 में रूचि ने पीएचडी की डिग्री धारण कर बुढ़ाना से पहली पीएचडीधारी लडक़ी बनी। जिसके बाद से डा. रूचि बडौत के दिगंबर जैन पीजी कॉलेज में संस्कृत विभागाध्यक्ष के पद पर तैनात हैं। इस उपलब्धि पर कस्बे के गणमान्य लोगों व संस्थाओं ने गौरवांवित होकर डा. रूचि को सम्मानित किया। डा. रूचि ने बताया कि उसका नौनिहाल राजस्थान के उदयपुर में है, जहां पर गरीबों के लिए चेरिटेबल हास्पिटल बन रहा था, उसने अपनी नौकरी के पहले दो माह का वेतन हास्पिटल निर्माण के लिए दान किया। उन्होंने बताया कि छुट्टी के दौरान चेरिटेबल हास्पिटल में एक नर्स के तौर पर गरीब मरीजों की सेवा भी की है। उसके बाद डा. रूचि ने निर्णय लिया कि साल में कम से कम एक माह का वेतन गरीबों के लिए दान जरूर करेगी। डा. रूचि ने नारायण सेवा संस्थान उदयपुर राजस्थान के माध्यम से अपने खर्च पर 41 पोलियो ग्रस्त बच्चों का ऑपरेशन कराया। जिसके बाद सभी बच्चे अपने पैरों पर चल सके। डा. रूचि शामली के कुष्ट आश्रम में कुष्ट रोगियों के लिए भी सहयोग करती हैं, वहीं संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए मेरठ की संस्कृत भारती संस्था से जुडकर सहयोग कर रही हैं। इतना ही नहीं बागपत के बरनावा में स्थित संस्कृत विद्यालय को भी समय-समय पर सहयोग देती है। डा. रूचि ने कस्बे में कई बार निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविरों का भी आयोजन करवाया है। उदयपुर व गाजियाबाद के अनाथआलयों में भी डा. रूचि अनाथ बच्चों के लिए सहयोग करती है। वासुदेव कुटुम्बकम समिति मुजफ्फरनगर की डा. रूचि उपसंस्थापिका हैं, जिसके माध्यम से वह गरीब बच्चों की फीस भी जमा कराती हैं। डा. रूचि ने बताया कि उनके घर में सफाई करने वाली महिला के घर की छत टूटी हुई थी, जिसे पक्की कराने के साथ-साथ उन्होंने उसकी आंखों के ऑपरेशन में भी सहयोग किया। डा. रूचि बुढ़ाना में राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख है और कस्बे में साप्ताहिक शाखा लगाती हैं, जिसमें लड़कियों को अनुशासित कर आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गुरूवार को कस्बे की अग्रवाल धर्मशाला में डा. रूचि सैकड़ों महिलाओं को एकत्रित करेंगी। जहां डा. रूचि महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देंगी।  डा. रूचि ने कहा कि नारी कोमल है, कमजोर नहीं इस पर महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया जाएगा। डा. रूचि का कहना है कि आज के दौर में समाज के ज्यादातर युवक नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। नशे के कारण उन्होंने कई घरों को बर्बाद होते देखा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का एक संगठन बनाकर जल्द ही नशा मुक्ति अभियान चलाया जाएगा और युवाओं को नशे के प्रति जागरूक किया जाएगा। ।

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