ट्रिपल तलाक बिल: कांग्रेस का समर्थन मगर इस नेता ने जताई असहमति

कांग्रेस ने एक बार में तीन तलाक कहने के चलन के खिलाफ संसद में लाये गए विधेयक का समर्थन करते हुए गुरुवार को कहा कि इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और गरिमापूर्ण जीवन की रक्षा के लिए और मजबूत बनाने की जरूरत है. पार्टी ने यह भी मांग की है कि इस विधेयक को स्थायी समिति में भेजा जाना चाहिए.

हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून व्यक्तियों के निजी जीवन में घुसपैठ है और यह दिवानी वाले मुद्दे को फौजदारी कानून के दायरे में ले आयेगा.

लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने विधेयक को स्थायी समिति में भेजने की मांग की. उन्होंने कहा कि स्थायी समिति में इस विधेयक पर व्यापक चर्चा हो सकेगी. उन्होंने कहा कि इस विधेयक को स्थायी समिति में भेजने की मांग सिर्फ कांग्रेस ही नहीं कई अन्य दलों की भी है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस ने तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत के मुद्दे को हमेशा इस मापदंड पर आंका है कि महिला अधिकारों की सुरक्षा हो और महिलाओं की बराबरी संविधान सम्मत तरीके से हो. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तीन तलाक के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया था.

ट्रिपल तलाक बिल: कांग्रेस का समर्थन मगर इस नेता ने जताई असहमति

ट्रिपल तलाक बिल: कांग्रेस का समर्थन मगर इस नेता ने जताई असहमति

सांकेतिक तस्वीर
भाषा
Updated: December 28, 2017, 9:39 PM IST
कांग्रेस ने एक बार में तीन तलाक कहने के चलन के खिलाफ संसद में लाये गए विधेयक का समर्थन करते हुए गुरुवार को कहा कि इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और गरिमापूर्ण जीवन की रक्षा के लिए और मजबूत बनाने की जरूरत है. पार्टी ने यह भी मांग की है कि इस विधेयक को स्थायी समिति में भेजा जाना चाहिए.

हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून व्यक्तियों के निजी जीवन में घुसपैठ है और यह दिवानी वाले मुद्दे को फौजदारी कानून के दायरे में ले आयेगा.

लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने विधेयक को स्थायी समिति में भेजने की मांग की. उन्होंने कहा कि स्थायी समिति में इस विधेयक पर व्यापक चर्चा हो सकेगी. उन्होंने कहा कि इस विधेयक को स्थायी समिति में भेजने की मांग सिर्फ कांग्रेस ही नहीं कई अन्य दलों की भी है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस ने तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत के मुद्दे को हमेशा इस मापदंड पर आंका है कि महिला अधिकारों की सुरक्षा हो और महिलाओं की बराबरी संविधान सम्मत तरीके से हो. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तीन तलाक के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया था.


उन्होंने कहा कि कांग्रेस तीन तलाक को प्रतिबंधित करने वाले कानून का समर्थन करती है. हमारा यह मानना है कि महिलाओं के संगठन और मुस्लिम संगठनों की राय के अनुसार इस कानून को और पुख्ता बनाने की आवश्यकता है. महिला संगठनों की मांग के अनुसार इस कानून को और मजबूत बनाकर इसे और महिला पक्षधर बनाने की जरूरत है.

पार्टी ने इस प्रस्तावित कानून को और मजबूत बनाने के लिए कुछ सुझाव दिये. महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने की बात कही गयी है. किंतु गुजारे भत्ते के निर्धारण का तौर तरीका नहीं बताया गया है. सरकार को इस बारे में व्याख्या करनी चाहिए.

सुष्मिता ने कहा कि 1986 के मुस्लिम महिला संबंधी एक कानून के तहत तलाक पाने वाली महिलाओं को गुजारा भत्ता मिल रहा है. कहीं नये कानून के कारण उन्हें यह गुजारा भत्ता मिलना बंद न हो जाए.

उन्होंने कहा कि मौजूदा विधेयक में तीन तलाक साबित करने की जिम्मेदारी महिला पर डाली गयी है. उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि मामला महीनों खिंचेगा. गरीब महिलाएं यह साबित करने के लिए अदालतों के चक्कर लगाती रहेंगी कि उन्हें तीन बार तलाक दिया गया कि नहीं. उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी पति पर क्यों नहीं डाल दी जानी चाहिए? इससे यह कानून और कठोर एवं महिलाओं के पक्ष में हो जाएगा.

पार्टी ने कहा कि इस विधेयक में पति को तीन साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है. महिला संगठन यह कह रहे हैं कि यदि पति जेल चला गया तो उसकी पत्नी एवं बच्चों का गुजारा भत्ता कौन देगा? क्या महिला पति की संपत्ति से गुजारा भत्ते का धन ले सकती है, इस बारे में प्रस्तावित कानून में कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

खुर्शीद ने कहा, ‘यह व्यक्तियों के निजी जीवन में घुसपैठ है. परिवार तक फौजदारी कानून ले जाने में आपको सतर्क रहना होगा. तलाक को किसी भी तरह से फौजदारी का मामला बनाना, दुनिया में कहीं भी स्वीकार्य नहीं है.’ उन्होंने कहा कि तलाक या तलाक के नतीजे दिवानी कानून का क्षेत्र हैं और यह फौजदारी कानून में नहीं आते. यह फौजदारी कानून में तभी आता है जब वहां हिंसा हो.

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